होम लोन vs किराया — 2026 में आर्थिक रूप से कौन बेहतर?
CardKhoj संपादकीय टीम 14 min read24 March 2026
वित्तीय अस्वीकरण
अस्वीकरण: यह जानकारी केवल शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है। कोई भी वित्तीय निर्णय लेने से पहले हमेशा प्रमाणित वित्तीय सलाहकार से परामर्श करें।
भारत की बड़ी दुविधा: खरीदें या किराये पर रहें?
मेट्रो शहरों में जहां प्रॉपर्टी की कीमत ₹1-3 करोड़ है, खरीदने बनाम किराये का समीकरण काफी बदल गया है। किराये की उपज सिर्फ 2-3% है जबकि होम लोन दर 8.5-9.5% है — कई मामलों में किराये पर रहना वित्तीय रूप से ज्यादा समझदारी है, लेकिन भावनात्मक और दीर्घकालिक कारक भी मायने रखते हैं।
लागत तुलना: मुंबई में ₹80 लाख की प्रॉपर्टी
| कारक | खरीदना | किराया |
|---|---|---|
| मासिक खर्च | ₹65,000 (EMI) | ₹25,000 (किराया) |
| डाउन पेमेंट | ₹16 लाख (20%) | ₹75,000 (3 महीने) |
| टैक्स बेनिफिट | ₹3.5 लाख/साल (सेक्शन 24 + 80C) | HRA (अगर लागू) |
| कुल लागत (20 साल) | ₹1.56 करोड़ | ₹60 लाख (5% बढ़ोतरी) |
| संपत्ति मूल्य (20 साल) | ₹2.4 करोड़ (5% CAGR) | ₹0 |
कब खरीदें बनाम किराया?
खरीदें अगर: 10+ साल रहने की योजना है, 20%+ डाउन पेमेंट है, EMI आय का 40% से कम है। किराये पर रहें अगर: बार-बार शहर बदलते हैं, फर्क की रकम इक्विटी में निवेश करना चाहते हैं, या आपके शहर में प्रॉपर्टी कीमतें अनुचित रूप से ऊंची हैं।